(1) मरीचि के पुत्र कश्यप प्रजापति थे। ब्रह्मदेव की दाहिनी हाथ की बोटे की नली से दक्ष नाम का पुरुष और बाएँ हाथ की बोटे की नली से धरनी नाम की स्त्री जन्मीं। उन दोनों से एक हज़ार-हज़ार महा ऋषि जन्मे। (2) ब्रह्मा के मानस पुत्रों में दूसरे स्थान पर रहने वाले अंगिरस्‍ु को उद्दध्य, बृहस्पति और संवर्त जैसे पुत्र हुए। बृहस्पति देवताओं के आचार्य बने। (3) मैत्रि (अत्रि) नामक मानस पुत्र से अनेक महा मुनि जन्मे। (4) पुलस्त्य नामक ब्रह्मा के मानस पुत्र से राक्षसों का जन्म हुआ। (5) पुलह नामक मानस पुत्र से किन्नर और किमपुरुष वर्ग उत्पन्न हुए। (6) क्रतू नामक मानस पुत्र से पक्षियों की जाति उत्पन्न हुई।

   
    


॥ श्रीः ॥
6.24. अध्यायः 024
Mahabharata - Bhishma Parva - Chapter Topics
सञ्जयेनोभयसेनयोरभ्युदयवर्णनम् ॥ 1 ॥
Mahabharata - Bhishma Parva - Chapter Text

धृतराष्ट्र उवाच। 6-24-0x(4005)(39449)
केषां प्रहृष्टास्तत्राग्रे योधा युध्यन्ति सञ्जय।
उदग्रमनसः के वा के वा दीना विचेतसः ॥ 6-24-1(39450)
के पूर्वं प्राहरंस्तत्र युद्धे हृदयकम्पने ।
मामकाः पाण्डवेया वा तन्ममाचक्ष्व सञ्जय ॥ 6-24-2(39451)
कस्य सेनासमुदये गन्धो माल्यसमुद्भवः ।
वायुः प्रदक्षिणश्चैव योधानामभिगर्जताम् ॥ 6-24-3(39452)
सञ्जय उवाच। 6-24-4x(4006)
उभयोः सेनयोस्तत्र योधा जहृषिरे तदा।
स्रजः समाः सुगन्धानामुभयत्र समुद्भवः ॥ 6-24-4(39453)
संहतानामनीकानां व्यूढानां भरतर्षभ ।
संसर्गात्समुदीर्णानां विमर्दः सुमहानभूत् ॥ 6-24-5(39454)
वादित्रशब्दस्तुमुलः शङ्खभेरीविमिश्रितः।
शूराणां रणशूराणां गर्जतामितरेतरम् ॥ 6-24-6(39455)
उभयोः सेनयो राजन्महान्व्यतिकरोऽभवत्।
अन्योन्यं वीक्षमाणानां योधानां भरतर्षभ।
कुञ्जराणां च नदतां सैन्यानां च प्रहृष्यताम् ॥ ॥ 6-24-7(39456)

इति श्रीमन्महाभारते भीष्मपर्वणि भगवद्गीतापर्वणि चतुर्विशोऽध्यायः ॥


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